जब नीरज जी का सान्निध्य मिला

जन्मशती(4 जनवरी )पर विशेष संस्मरण आलेख -
जब नीरज जी का सान्निध्य मिला
- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

ज्यों लूट ले कहार ही दुल्हन की पालकी
हालत यही है आजकल हिन्दुस्तान की ।
जैसी पंक्तियां लिखकर देश की हालत बयान करने वाले और इंसान को मजहबी चंगुल से निकालने का आह्वान करती पंक्तियों -
अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाये,
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाये। के रचनाकार गीत ऋषि पद्मभूषण प्रोफेसर गोपालदास नीरज जी की आज जन्मशती है।


गोपालदास नीरज (4 जनवरी 1925 - 19 जुलाई 2018), हिन्दी साहित्यकार, शिक्षक, एवं कवि सम्मेलनों के मंचों पर काव्य वाचक एवं फ़िल्मों के गीत लेखक थे। वे पहले व्यक्ति थे जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया, पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से। यही नहीं, फ़िल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिये उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला था ।( सन्दर्भ विकीपीडिया)


धामपुर में 2016 की 15 मई को उनका नागरिक अभिनंदन किया गया था। उस दिन नीरज जी से मिलने,उनको सुनने और कुछ बात करने का अवसर इन पंक्तियों के लेखक को मिला था।
इसके पूर्व एक प्रकाशन के शुभारंभ पर बिजनौर में भी उनका सान्निध्य मिला।अनेक फिल्मों के गीत देने वाले नीरज जी सहज,सरल और व्यवहार कुशल व्यक्तित्व के धनी थे।
उनके दर्शन का प्रथम अवसर था दिसंबर 2014 में एक प्रकाशन के उद्घाटन अवसर पर नीरज जी आये थे। इस आयोजन में धामपुर से डॉ शंकरलाल शर्मा जी के साथ अरुण शर्मा अरुण, हरिकांत शर्मा और मैं अनिल भी शामिल हुए थे।

 ठंड और बारिश का मौसम होने के बाबजूद जिले भर के विभिन्न साहित्यकार वहां उपस्थित थे।उस दिन नीरज जी का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं था, अपनी गाड़ी से सीधे व्हील चेयर पर बैठकर ही वह मंच तक पहुंचे। पब्लिक इमोशन के संपादक डॉ.पंकज भारद्वाज ने दीप प्रज्ज्वलित करने में उनका सहयोग किया था।अध्यक्षता डॉ.ज्ञानेशदत्त हरित जी ने और चिंगारी के संपादक डॉ.सूर्यमणि रघुवंशी ने नीरज जी के व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए इस गरिमामय समारोह का सफल संचालन किया था। अस्वस्थता के कारण इस आयोजन में नीरज जी ने संक्षिप्त संबोधन किया और तुरंत ही वापस भी चले गये थे। मंच से उतरकर गाड़ी तक जाने के बीच ही हम सबने उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था।



फिर 2016 में 15 मई का वह दिन आया जब नीरज जी के धामपुर आगमन पर उनसे मेरी पुस्तक का विमोचन करवाने के लिए गुरुजी डॉ.शंकरलाल शर्मा जी ने पहले ही कह रखा था। उस दिन दोपहर दो बजे के लगभग धामपुर के डाक बंगले में मैं मित्र महेश शर्मा जी और डॉ. भूपेन्द्र कुमार के साथ पंहुचा तो गुरुजी ने कमरे में बुलवा लिया और नीरज जी से कहा कि सर,यह हमारे बाद वाली साहित्यिक पीढ़ी है सर।यह कुछ लिखते हैं तो मुझसे सलाह कर लेते हैं। यह अनिल शर्मा 'अनिल' की नयी पुस्तक है प्रकृति का ऐसे न शोषण करो,आप इस‌पर अपने हस्ताक्षर करके विमोचन कर दीजिए।



हमने नीरज जी के चरण स्पर्श किए, उन्होंने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और फिर पुस्तक हाथ में लेकर विमोचन की औपचारिकता पूरी कर दी और विमोचित प्रति पर हस्ताक्षर भी किए।  


उस दिन उनको बुखार भी था और शाम को शुभम मंडप में सार्वजनिक अभिनंदन था तो
गुरुजी ने  कहा कि अब, सर (नीरज जी) को आराम करने दिया जाए। हम वहां से वापस आ गये।
दोपहर में भोजन के बाद नीरज जी डॉ.शंकरलाल शर्मा जी के आवास पर गये। वह एक आलेख में लिखते हैं कि गुरु जी ने पूछा,तुम्हारा घर कितनी दूर है? बिजनौर से तो दूर बताकर टाल गये थे,अब तो ले चल भई। मैंने विनम्रतापूर्वक कहा-
कि सर,घर पर तो आपका इंतजार हो रहा है।
तो फिर चलो।
हम आनन-फानन में शुगर मिल वाले बाईपास से निकलकर निलयम पंहुचा गये। वहां मयंक, श्वेता,सुयश थे।.... श्रीमती जी सच में प्रतीक्षा में थी। पड़ोसी श्री सी पी सिंह सपत्नीक थे। गर्मी बहुत थी,ए सी चल रहा था।एक कमरा ठंडा किया गया। मेरे निर्देशन में उन पर हुए दो शोधकार्यों के शोध प्रबंधों पर अपने हस्ताक्षर किए। मेरे द्वारा लिखित प्रकाशित सभी अठारह रचनाओं पर हस्ताक्षर करके उन्हें अमरत्व प्रदान किया।(संदर्भ-चिंगारी)


शाम को शुभम मंडप में नीरज जी का नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम था। मंडप खचाखच भरा था
तत्कालीन पर्यटन राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश मूलचंद चौहान भी उपस्थित थे। नीरज जी के आने से पहले उनके जीवन पर आधारित डाक्यूमेंट्री का प्रदर्शन चलता रहा जिसमें उनकी साहित्यिक और फिल्मी दुनिया की उपलब्धियों को दर्शाया गया था।
नियत समय पर कार्यक्रम हुआ।नीरज जी का धामपुर में भव्य नागरिक अभिनंदन हुआ।इस आयोजन का श्रेय तो डॉ.शंकरलाल शर्मा जी को ही था,नीरज जी ने अपने संबोधन में कहा भी,
शंकर जैसा शिष्य हर गुरु को मिले जो बानवे वर्ष की इस अवस्था में अपने गुरु को अपने कार्य नगर में सम्मानित कर रहा है।
यह सुनकर हमें भी गौरव की अनुभूति हुई कि
धामपुर को डॉ. शंकरलाल शर्मा जैसे व्यक्तित्व के कारण महान गीत ऋषि नीरज जी को सुनने देखने का अवसर मिला।
उनकी जन्मशती के अवसर पर सादर नमन।
डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'
धामपुर 

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