बदलते परिवेश में पत्रकारिता के समक्ष चुनौती
बदलते परिवेश में पत्रकारिता की
चुनौती:कारण और निवारण
डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'
वरिष्ठ पत्रकार वैद्यराज गंगाधर द्विवेदी जी
पत्रकार को परिभाषित करते हुए कहते हैं
-"पतनात् तारयति इति पत्रकार।"
अर्थात् जो पतन से तारता है, वहीं पत्रकार हैं।
यह परिभाषा एकादमिक रुप से भले ही मान्य
न हो, लेकिन वास्तविकता यही है।
वर्तमान में चुनौतियां
जब पारंपरिक मीडिया के साथ साथ, समाज में सोशल मीडिया सक्रिय हुआ अब मुख्य मीडिया
को एक पक्षीय होता हुआ सबने देखा और तब सकारात्मक पत्रकारिता पर नकारात्मक पत्रकारिता हावी होने लगी। मीडिया हाउस तय करने लगे कि क्या दिखाया जाएं,क्या छापा जाए?
बड़े बड़े जन आन्दोलनों और प्रदर्शनों के प्रति सौतेला व्यवहार अपनाकर उनकी अनदेखी करना कथित मीडिया करने लगा। हर घटना को किसी एक विशेष कोण से देखना और उसी नजरिए से प्रस्तुत किया जाने लगा,तो मीडिया की विश्वस्नीयता प्रभावित होने लगी। कट काफी पेस्ट करके उसे ही
एडिटिंग मान लेना और तोड़-मरोड़ कर खबरें पेश करने की संस्कृति मीडिया मे इतनी बढ़ी है कि कि संदर्भों को ही बदलते हुआ सब देखते हैं।अब मीडिया के समक्ष चुनौती है अपनी विश्वसनीयता
को बचाए रखना।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ जिस तरह से अन्य स्तंभों की तरह व्यवसाय बन गया और मालिकों के व्यावासिक हित सर्वोपरि हो गये।पतन से बचाने वाले अपने व्यवसायिक हितों के लिए इससे विमुख होकर स्वयं पतन की ओर बढ़ चले तब ऐसे में पत्रकारिता के समक्ष एक ही चुनौती है - निष्पक्षता को बचाए रखना, मानवीय मूल्यों और मानवता को बचाए रखना।
यह चुनौतियां होने के कारण
देश की आजादी में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका यूं ही नही रही।इसको एक हथियार के
रुप में प्रयोग किया गया। समाज और राष्ट्र को
सही दिशा देना और लोकतांत्रिक मूल्यों का
पोषण संरक्षण ही पत्रकारिता का उद्देश्य होता है।
वर्तमान में पत्रकारिता इस पर से भटकने लगी है।
इसके अनेक कारण हैं जैसे व्यवसायिक हित,किसी
विशेष राजनीतिक विचारधारा के प्रति लगाव होना,
त्वरित लाभ उठाना और अति महत्वाकांक्षी होना आदि आदि।
इन चुनौतियों के निवारण हेतु सुझाव
इन तमाम चुनौतियों के बीच अपने अस्तित्व को
बचाते हुए व्यवसाय और मिशन में संतुलन बनाएं
रखते हुए पत्रकारिता के मूल्यों को बिना हानि
पहुंचाए कार्य करनके से ही पत्रकारिता इन सबसे
पार सकती है। अपने छोटे छोटे स्वार्थों से परे
हटकर राष्ट्र और समाज हित में अपनी विश्वसनीयता
और निष्पक्षता को प्रभावित न होने दिया जाए।
डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल',धामपुर
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